Ye Terapanth Hamara

(लय : ईन्सान से ईन्सान को हो)
सो सो वरसो से दे रहा जग को उजियारा
 ये तेरापंथ हमारा ,यह तेरापंथ हमारा -2
हम भाग्यवंत है यह पंथ हमे प्राणों से प्यारा यह तेरापंथ हमारा
यह तेरापंथ हमारा – 2
भिक्षु की गरिमामयी वाणी बोल रही घर घर में
वीणा की झंकार सी रस घोल रही हर नर में –
रस घोल रही हर नर में
यह तेरापंथ हमारा – 2
गरजा गहज घन गूंज उठा चंहुदिश यह नारा – यह तेरापंथ हमारा – 2
भारीमाल ऋषि रायचन्द की महिमा ना अनजाणी
जयाचार्य गौरव गाथा मनाया मुख से ना जाय वखाणी
मर्यादित शासन सरिता की वही अनुपम धारा – यह तेरापंथ हमारा – 2
मघवा भावक डालिम की थी सूझबूझ चतुराई
कालु कान्तद्वीप मुख मंजुल लिए हुए अरुणाई
गणनायक गणशिक्षक का तूं एक उदित 2 सितारा – 
यह तेरापंथ हमारा – 2
युवा ज्योति युवको दिल में शक्ति नवीन जगाए
तुलसी तेरापंथ पंथ तुलसी पर्याय कहाए
युग युग तक तेरी प्रेरणाओं का रहे सहारा- यह तेरापंथ हमारा – 2
देशामाचार्य श्री महाप्रज्ञ के चरणतन शीण झुकाए
महाविज्ञ महामानव के गुण हिलमिल कर हम गाऐ
प्रज्ञा का प्रसरे परम प्रनीत पेगाम तुम्हारा – यह तेरापंथ हमारा – 2
महा महिषी महाश्रमण सा रत्न अमोलक पाया
बन्द हुए ऐसा गुरु पाकर हर मन है हर्षाया
हो जाए रोशन दिग दिगन्त में नाम तुम्हारा – यह तेरापंथ हमारा – 2

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