Diksha Par Gey Muktak

दीक्षा पर गेय मुक्तक 
1
संसार में माना गया र्दुलभ ये नर का तन । 
लेकिन भटकता भोग और विलास में ये मन ।।
सौभाग्य से हमें मिला महा वीर का शासन 
जो बोलता है आज भी ,संयम  ही है जीवन  ।।
2
दीक्षा का अर्थ है, आध्यात्मिक शरण । 
संयम का मार्ग है सचमुच रुपान्तरण ।
ज्ञान का खजाना मिले वैरागी भाव। 
गुरु के चरणों में सर्वस्व समर्पण |
3
मोक्षका प्रवेश द्वार दिव्य ये सोपान । 
जिन्दगी की नाव पहुंचे भवसागर पार
 संयम तपस्या है जिससे गुजर के
 व्यक्ति बन जाता है काँच से कंचन ।। 
4
वक्त है नदी की धार जिसमें सब बह रहे। 
जानते हुये भी इस‌की मार सह रहे।
 धार को घुमा रहे है कुछ बिरले जन
उनमें से एक है वैरागी नमन
5
नमन तुम्हारे भावो को सबका नमन।
  खेलने की उम्र में ये कैसा डिसीजन 
साहस और हिम्मत को साधूवाद है 
महिला मंडल करता तुम्हारा अभिनंदन 

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