(लय- ओल्यू)(मंगल भावना) विदाई
होजी म्हारा मोटा सतियाँ, मनड़ो लगायर सिध चाल्याजी सतियां जी
भक्ता न भुलायर सिध चाल्याजी सतिया जी ॥
①नित उठ दोडया-2 आवता,
जीकारो सुणीन रोम रोम खिल जाताजी सतियां जी
२ मीठी-2 वाणी मन लुभावणी, सूतर रो बखाण चेत आव जी सतिया जी
३चौमासो तो सतिवर सारो बीतग्यो ,चार महिना लाग्या चार दिना सा जी सतियाजी
४सिलीगुड़ी री बाया कर विनती, सिलीगुडीं न याद रखाजो जी सतियाजी
५ कोई भूल आशातना म्हासू हुई तो दिल स्सू माफी चावा जी सतियाजी