माया के ओ पुजारी आगे की कुछ खबर है।
इस घर से और आगे एक दूसरा भी घर हैं।
① इतना ना जुलम करतू धरती भी काँप जाए।
वरना दुखी की आहे तेरा निशां मिटाये
अब भी जरा संभल तू डर मौत का अगर है।
2) जो पाप कर चुके हैं और अब भी कर रहे है
कुते की मौत देखो वो पापी मर रहे हैं।
मरकर ना चैन पाये पापों का यह असर है।
3 क्यू भूलता अरे तू दिन पड़ेगा जाना
महलों को छोड़ पगले जंगल में हो ठिकाना
कुछ तो सामान करले लम्बा बड़ा सफर है।
4) रावण व कंस बाली सब वीर मर गये है।
तुलसी व सूर मीरा मरकर भी तर गए हैं
दुष्टो का नाम डूबा हरिभक्त सब अमर है।