(लय- बादलियो आंखडल्या में बरस्यो)
रूंरूं में साँवरियों बसियो सांवरियो बसियो
चंद चकोर निहारेला ओ संता
गुरु चरणा रो, बणग्यो रसियो ,बणग्यो रसियो
मांझी पार उत्तारेला ओ संता
① आप पिता पुत्र मै हूं ओ तो व्यवहार है
आखिर आपा दोन्या नै ही, गुरु रो आधार है
गुरु ही कारज सारेला, ओ भंते
② निश्चै में गुरुदेव ही मां-बाप, आप मान लो
म्हारी अन्तर आत्मा री भावना पिछान ल्यो
मिथ्या आग्रह हारेला ओ संते
③ बोल सुन्या किसनोजी रो पारो पूरो चढग्यो
रोष और सांस रोअपार बेग बढ़ग्यो
विग्रह काम बिगाड़ला ओ भंते
स्वामी जी भी छोड़ मने तू भी छोड़ देवेला
सोच जरा पछे महारे , साथे कुंण रेवेला
आभो आंख उघाड़े ला ओ भंते
म्हारे सागे रेहणो पड़सी नहीं कोई चारो है
बुढ़ापा मे थार बिना और कुण सहारो है
म्हारो हृदय विदारे ला ओ भंते
⑥ थारो ल्यायो आहार म्हान खाणे रा ही त्याग है
मोह ममता छोड़ धारयो, पूरण वैराग है।
सत्याग्रह उद्धारेला ओ भंते
⑦ दोय दिन बीत्या, नहीं खायो ओर पीयो है अंधेरें मे जाने कोई चास दियो दियो है
तीज दिन ललकारे ला ओ भंते
ओ है थारो भक्त ईरा थे ही भगवान हो
आण सूप्या स्वामीजी ने समो बो महान हो
श्रद्धा सदा उबारेला ओ भंते
⑥ उठी है आवाज पड़ सी सारा नै गुण गावणा
भीखण जी री बुद्धि देखो तीना घरा बधावणा
तुलसी तरू रे तारला ओ भंते