बधावो-३
पांच बधावा म्हारै उमट आया।
आया ओ ज्ञान, दर्शन चारित्र निर्मलाजी, पहले बधावै म्हानै ज्ञान सुवावै, सुवावै ओ ज्ञानी साधां री सेवा म्हे करांजी ।।१।।
दूजै बधावै म्हानै तप सुवावै, सुवावे ओ तपसी साधां री सेवा म्हे करांजी ।।२।।
अगणे बधावै म्हानै खीम्या सुवावै, सुवावै ओ खीम्या साधाँरी सेवा म्हे करांजी।।३।।
चौथे बधावै म्हानै शील सुवावै, सुवावै ओ शील साधां री सेवा म्हे करांजी ।।४।।
पांचवै बधावै म्हाने समगत सुवावै, सुवावै ओ समगत साधांरी सेवा म्हे करांजी ।।५।।
धर्म सुसरोजी म्हानै घणो रे सुवावै, सुवावै ओ समता सासुजी रे पाय म्हे पड़ा जी।। ६ ।।
संवर जेठसा म्हानै घणो रे सुवावै, सुवावै ओ समता जेठाणी रा मीठा बोलणाजी।।७।।
लज्जा नणदल म्हानै घणी रे सुवावै, सुवावे ओ नितरा नणदोई प्यारा पावणांजी ।।८।।
संतोषी पुत्र म्हानै घणो रे सुवावै, सुवावे ओ कुल ने बवां रो जाजो झुलरोजी ।।९।।
घीवडल्यां रो म्हानै लाड़ सुवावै, सुवावै ओ, सरस जवायां रो पड़वै पोड़णोजी।।१०।।
धीरज पिताजी रो म्हानै लाड़ सुवावै, सुवावै ओ, दया माताजी स्यूं जाय कद मिलाजी ।।११।।
केवल काकोजी म्हानै लेवण आया म्हे जास्या ओ, मुगत पीवरीये प्यारा पावणाजी ।।१२।।
शील सुरंगो सायब घणो रे सुवावै, सुवावै ओ, सरल सायबाणी रो शील सुहावणो जी।।१३।।