।। जय भिक्षु गुरुभ्योनमः ।।
श्री भिक्षु चालीसा
।। दोहा।।
भिक्षु भिक्षु गणपाल की, महिमा है सर्वत्र।
तेरापंथ समाज के, ज्योतिर्मय नक्षत्र।।।।।
उनकी करूणा दृष्टि से, निश्चित बेड़ा पार।
“मुनि कन्हैया” नित रटो, भिक्षु नाम अविकार । ।2।।
।। चौपाई।।
जय जय जय हे भिक्षु स्वामी। महावीर पथ के अनुगामी ।।।
सतरह सौ तिरयाँसी आया। आषाढ़ सुदी तेरस दिन भाया।2।
जन्म हुआ गुरूवर का भारी। पुर कंटालिया में सुखकारी। 3।
दीपांजी के लाल दुलारे। बल्लुजी के कुल उजियारे ।4।
बचपन में भी गौरव पाया। अद्भुत बुद्धि प्रयोग दिखाया 151
यौवन में वैराग्य जगा है। संयम लेने मन उमगा है।6।
करके शाश्वत सत्य समीक्षा। पायी भागवती शुभ दीक्षा 171
मोह द्रोह का बंधन तोड़ा। साम्य साधना में दिल जोड़ा ।8।
शास्त्राभ्यास किया सुखकारी। पाई ज्ञान संपदा भारी ।9।
राजनगर में बोध मिला है। अन्तर-तम का दुर्ग हिला है।10।
आगम मंथन करके पाया। सत्य तत्व नवनीत सुहाया ।।।।
धर्म क्षेत्र में क्रान्ति मचाई। आत्मिक बल से लड़ी लड़ाई।12।
कष्ट अंधेरी ओरी वाला। घट घट में भर गया उजाला ।13।
तेरापंथ की नींव लगाई। जिन शासन महिमा महकाई।14।
शिथिलाचार समूल मिटाया। शुद्ध साधना-पथ अपनाया।15।
दान-दया का भेद सिखाया। व्रत अव्रत का रूप बताया। 16।
जन-विरोध का भय न सताया। आगम सम्मत तथ्य सुनाया। 17।
धन से नहीं धर्म का नाता। मन को साधे वह सध जाता। 18।
मर्म बोधिनी सच्ची वाणी। जन-जन में गूंजी कल्याणी । 19।
गान विनोद विरोध सहे थे। आत्म लक्ष्य पर अडिग रहे थे। 20
मिला न वर्षों भोजन पूरा। फिर भी तजा न काम अधूरा । 21
नहीं स्थान रहने को पाया। पर मन सुमन नहीं मुरझाया 22
मरघट में भी वास किया था। जीत जगत विश्वास लिया था। 23 ।
लेते आतापन तपधारी। प्रति पद जन जाते बलिहारी।24
समझाने में रात बिताई। सम्यक दृष्टि सदा सरवाई 25 शिक्षामृत का पान कराया। लाखों जन को गुप्त बनाया 25
जिनवाणी का शंख बजाया। जन्म-जन्म का रोग मिटाया एक डोर में संघ चलाया। प्रेम-भाव का स्रोत बहाया आत्मसमर्पण पाठ पढ़ाया। जैन धर्म का ध्वज लहराया 29) सिरियारी में रंग लगाया। सात प्रहर का अनशन आया३०
साठअठारह सौ सुखदाई।भाद्रव शुक्ला तेरसआई31 स्वर्ग पधारे भिक्षु स्वामी। सन्त शिरोमणीअन्तर्यामी(32)
मन्त्र स्वयं प्रभु नाम तुम्हारा।शरणागत को तारनहारा33 मंगलकारी जाप तुम्हारा।मिल जाये भवसिन्धुकिनारा34
पाकर दर्शन जीवन बुटी। भक्त ‘शोभ’ की बेडी टूटी35
स्मृति की शाखा सदाहरी है।पटवोजी ने विजय बरी है।36
भिक्षु भक्ति में दिल को जोड़ा। टूटा रूपांजी का खोड़ा। 37
भिक्षु नाम उत्तम फल दाता। भूत प्रेत भय दूर भगाता ।38
चालीसा यह भाग्य विधाता। जन-जन को देत्ता सुख साता । 39
‘मुनि कन्हैया’ बन संस्कारी। स्थिर मन पाठ करो नर-नारी 40
। । दोहा।।
विघ्नहरण मंगलकरण, स्वामी भिक्षु नो नाम।
गुण ओलख सुमरण कर्या, सरै अचिन्त्या काम।।
आचार्य भीखण की जय, दीपां-नंदन की जय
दुःख-निकंदन की जय, भय-प्रभंजन की जय।।
आरती।।
ओम् जय भिक्षु स्वामी।
तेरापंथ प्रेणता, जिनवर अनुगामी ।। (ध्रुव)
भिक्षु नाम सुखदाता, जग में जयकारी।
रोग शोक भय भंजक,शुभ मंगलकारी।।
त्याग तपस्या द्वारा, जीवन चमकाया।
जैन धर्म का झण्डा, घर-घर लहराया।।
मर्यादा पुरुषोत्तम,जन-मन उजियारा
तेरी कीर्ति अमर है जैसे ध्रुवतारा।।
समता संयम धारी उज्जवलआचारी।
जैनागम विज्ञाता, शिवपथ संचारी ।।
भिक्षु भिक्षु के जप से, मनवांछित फलते।
‘मुनि कन्हैया’ पल में, सब संकट टलते ।।