इण रे पिपलड़ी रा नवं दस डाला,
आदिनाथ बस्यां स्वामी पोल चिनावी,
उठो माता मोरादेवी थारो सफल निहारो
आंगन दोनी केसर रो जी छांटो,
रिमझिम केसर की लहरांजी आयें,
जठै स्वामी आदिनाथ आद हलावे ।।१।।
इण रे पिपलडी रा नव दस डाला,
नेमीनाथ बस्या स्वामीपोल चिणावो,
उठो माता सेवादे थांरो सफल निहारो,
आंगन दोनी किस्तुरी रो छांटो
रिमझिम किस्तुरी की लहराजी आवै,
जठै स्वाम नेमीनाथ राजुल त्यारे ॥२॥
इणरे पिपलड़ी रा नव दस डाला,
पार्श्वनाथ बस्यां स्वामी पोल चिणावो,
उठो माता बामादे थांरा सफल निहारो,
आंगण दोनों कूँ-कूँ रोजी छाँटो,
रिमझिम कूँ-कूँरी लहराजी आवै,
जठै स्वामी पार्श्वनाथ पशु रे छुड़ावै ॥३॥
इण रे पिपलड़ी रा नव दस डाला,
महावीर वस्यां स्वामी पोल चिणावो,
उठो माता त्रिशलादे थांरो सफल निहारो,
आंगण समदर री लहराजी आवै,
जठै स्वामी जठै स्वामी महावीर मैलो मडाव ।।४॥ (महावीर तीर्थ थाप, )
इण रे पिपलडी रा नव दस डाला,
महाश्रमण बस्यां स्वामी भास-चौमासो,
उठो माता नेमा दे थांरो सफल निहारो.
आंगण दोनी दूधारो जी छोटो, जठै रिमझिम दूधा री लहराजी आवै, , जठे स्वामी, महाश्रमण पाट दिपावै (सूत्र सुनावै )।।५।।
इण रे पिपलड़ी