Karte Miljul Kar Ham

(तर्ज – होठो से छूलो तुम)

करते मिलजुल कर हम् तप का अभिनन्दन है 
तपसी के चरणों में करते शत वन्दन है
दृढ़ मजबूती हम देख देख हरखे 
छोटी वय में तेरा, ये तप ‌बिरवा सरसे ॥ 
सौ बार बधाई है भावोका अर्चन हैं 
* निर्मल तप गंगा में कलमष तुमने धोया
 अपनी दृढ़ इच्छा से तप का बिरवा बोया 
स्वागत करते हैं हम लेकर तपका-चंदन,
मंजुल भावो से हम, तुमहे  आज बधाते है
 तप अभिनंदन पर  हम गीत सुनाते हैं। 
कुल कलश चढ़या है, खुशियों का है सावन

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top