Koyaldi Ku Hu Kuhu Moriya Ji Bole(Chobisi)

चौबीसी

 कोयलड़ी बोले कुहु — मोरिया जी बोले-2

उगते सूरज न करू वंदन महावीर जी, 
म्हान भव भव सू तारो
 पहला ऋषभ नाथ जिणजी ने बांदू 
दूजा अजितनाथ देव ओ ,महावीर जी 
म्हान, भव-२ सू तारो
तीसरा संभवनाथ जिणजी ने बादूं चौथा अभिनंदन देव ओ महावीर जी म्हान, भव-२ सू तारो
पाँचवा सुमति नाथ जिणजी न बांदू छ्टवा पदम प्रभुदेव ओ महावीर जी म्हान, भव-२ सू तारो
बाकला भोजन कर चंदना न तारी,  उनरा भारी दुखड़ा  मेटयाओ महावीर जी म्हान, भव-२ सू तारो
सातवा सुपारस नाथ जिणजी ने बांदू आठवां चंदा प्रभु दैव ओमहावीर जी म्हान, भव-२ सू तारो
 नवमा सुविधिनाथ जिणजीने बांदू दसमा शीतल प्रभु दैव ओमहावीर जी म्हान, भव-२ सू तारो
ग्यारहवां श्रेयांश नाथ जिणजी ने बांदू बारहवां वासूपुज्य दैव ओ महावीर जी म्हान, भव-२ सू तारो
आपरे पांवा उपर खीर बनायी जलता अंगारा शीतल की धा ओ महावीरजीम्हान, भव-२ सू तारो
तेरहवां विमल प्रभु जिणजी ने बांदू चवदवा अनंत नाथ देवओ महावीर जी म्हान, भव-२ सू तारो
पन्द्रहवा धर्मनाथ जिणजी ने बांदू सोलहवां शांति नाथ देव ओ महावीर जी म्हान भव भव सूं तारो
अर्जुन माली रे उपर उपकार कीन्हो पापी ने थे तो तारया महावीरजी म्हान, भव-२ सू तारो
-19 वा मल्लिनाथ जी जिणजी न बांदू बीसवां मुनि सुब्रत देवओमहावीर जी म्हान, भव-२ सू तारो
इक्कीसवा नमिनाथ  जिणजी न बांदू बाईसवां अरिष्ट नेमीदेवओ महावीर जी म्हान, भव-२ सू तारो
23वा पार्श्व नाथ जिणजी ने बांदू 24 वा महावीर मोटा देवओ महावीर जी म्हान, भव-२ सू तारो
चंड़ कोशिक नाग ने कथा सुणाई नाग राज रो कीन्हो उद्धारओ महावीर जी म्हान, भव-२ सू तारो
अनंत चौबिसी न नित उठ बांदू बीस विहरमाण  देवओ महावीर जी म्हान, भव-२ सू तारो
ग्यारही गणधर जिणजी न बांदू,  तरण तारण गुरुदेव ओमहावीर जी म्हान, भव-२ सू तारो

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