May Mati Chikni Ji , (Bhachya, Tapsya Geet)

माया माटी चीकणी

मांय माटी चिकणीजी, फागण कलश बंधायक चित्त चितारियाजी। 
गाई जै।     ऋषभनाथ     गाई जैजी
माता, मोरां देजी रा नन्दक कलश बंधाईया जी 
कलशां के सोने का, डांडे के रूपैरा पड़गना जी। 
इसड़ा सा कुंभ कलश म्हारी तपस्या में चाहिजे जी 
इसड़ा सा रतन कलश म्हारी अठायां में चाहिजे जी ||१||
मांय माटी चिकणीजी, फागंण कलश बंधायक चित्त चितारियाजी।
गाई जै,      नेमीनाथ।       गाई जै जी। 
माता, सेवादेजी रा नन्दक कलश बंधाईया जी 
कलशां कै सोने का, डांडै कै रूपै रा पड़गना जो।
इसड़ा सा कुंभ कलश म्हारी तपस्या में चाहिजे जी।
इसड़ा सा रतन कलश म्हारी अठायां में चाहिजै जी।।२।।
 मांय माटी चिकणीजी, फागण कलश बंधायक चित्त चितारियाजी। 
गाई जै,      पारस नाथ।      गाई जै जी।
माता, बामा देजी रा नन्दक कलश बंधाईयाजी। कलशां कै सोने का, डांडै के रूपै रा पड़गना जी। इसड़ा सा रतन कलश म्हारी अठायां में चाहिजै जी।।३॥
 मांय माटी चिकणीजी, फागण कलश बंधायक चित्त चितारियाजी। गाईजै,महावीर स्वामी  गाईजै जी।
माता, त्रिशला देजी रा नन्दक कलश बंधाईयाजी। कलशां कै सोने का, डांडै कै रूपै रा पड़गना जी। इसड़ा सा कुंभ कलश म्हारी तपस्या में चाहिजै के
इसड़ा सा रतन कलश म्हारी अठायां में चाहिजै जी। ॥४॥
मांय माटी चिकणीजी, फागण कलश बंधायक चित्त चितारियाजी। गाई जै, भिक्षु स्वामी गाई जै जो।
माता, दीपा देजी रा नन्दक कलश बंधाईजै जी। 
कलशां के सोने का, डांडे के रूपै रा पड़गना जी 
इसडां सा कुंभ कलश म्हारी तपस्या में चाहिजे की
इसड़ा सा रतन कलश म्हारी अठायां में चाहिजै जी।।५।।
मांय माटी चिकणीजी, फागण कलश बंधायक चित्त चितारियाजी। 
गाई जै, महाश्रमण  गुरु वर गाई जै जी।
माता, नेमा देजी रा नन्दक कलश बंधाईजै जी। 
कलशां के सोने का, डांडे के रूपै रा पड़गना जी
 इसडां सा कुंभ कलश म्हारी तपस्या में चाहिजे जी
क इसड़ा सा रतन कलश म्हारी अठायां में चाहिजै जी

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