शासन-माता (झिर-मिर)
झिरमिर-झिरमिर मेवज बरसे ओ, परनाल्यां पाणी पडैजी।
उत्तर-दिखण स्यूं ओ मुनिसर आया ओ, आय उतरिया हरियै बड़ तलै जी।।
बुजत बुजत नगर डंडोल्यो ओ, शासन देवत माता रो घर किस्यो जी।
ऊची सी मेड़ी ओ अजब झरोखा ओ, केल झबरको माता रे बारणै जी।।
अब म्हारा सासुजी ओ साधां रे पधार्या ओ, मुनिसर बेरण आईयाजी।
सीरो बहरायो माता, साबुनी बहराई ओ, घेवर बहराया मोटै भाव स्यूं जी।।
दाल बहराई माता, चावल बहराया ओ, पापड बहराया मोटै भाव स्यूं जी।
तरकारी बहराई माता, तीवण बहराया ओ, तलणो बहरायो मोटै भाव स्यूं जी ।।
दूध बहरायो माता, दही रे बहरायो ओ, माखण बहरयो मोटै भाव स्यूं जी।
ओगा बहराया माता, पातरा बहराया ओ, पछेवड़ी बहराइ मोटै भाव स्यूं जी ।।
मुमत्ती बहराई मोटैभाव स्यूं जी ।।
सुण सुण ए म्हारी लाल पाड़ोसण बहन पाड़ोसण, म्हारी ए सासु आगै मत कहिजै ।।
गुन गीरी रो तनै लाडू ओ देस्यां ए, डावे ओ पग रो देस्यां नेवरों जी।
कांई ए करूं थांरो गुनगिरी रो लाडू ओ, तडखै ओ तोड़ा पग रो ताजणो जी।।
म्हारी ए जीभज बाई कुण बेल्यां री बींधी ए, कद थांरी सासु आवैकद कहवां जी।
अब म्हारा सासुजी ओ घरां रे पधार्या ओ, पड़ोसण दौड सामा गया जी।।
सुण, सुण ए म्हारी लाल पाड़ोसण, बहन पाड़ोसण, थारी ए बहवड़ साध बहराईयाजी।
देई न धोख्या माता देवता न धोख्या ओ, सगलां स्यूं पहली साध बहराईयाजी ।।
उठो बेटा हटीसींग कंवर हमारा ओ, पुत्र हमारा ओ, परी रे कड़ा ओघर री कुल बहुजी।
कालसा बदलदां ओ बेल जुताया ओ, आप भाडेती ठाकुर होय रयाजी ।।
सासरीयै न छोडया माता, पिवरियै न छोड्या ओ। अनरोई में छोड्या एकला जी,
नार बघेरा राणी रो भख लियो जी।।
सुखी तलाई माता, सुखा ओ बड़ला ओ, नीरफल अमला रे फल नहीं जी।
शीवकण बेटो तो हुयो रे भुखालु ओ, देवकण हुयो रे तिसायलोजी ।।
सुखी तलाई माता दूधां ओ भरीया ओ, नीरफल अमला रै फल घणा जी।
शीवकण बेटे नै आमलीया चूसाया ओ, देवकण दूध पिलाईयाजी ।।
अब म्हारा सासुजी ओ रसोया पधार्या ओ, रसोया रो थाम रत्नां जड्या जी।
सीरो संभाल्यो माता, साबुनी संभाली ओ, घेवरां रै दूणी डोडी सींग चढै जी।।
12तरकारी संभाली माता, तीवण संभाल्या ओ, तलणे रे दूणी डोड़ी सींग चढे जी।
दूध संभाल्यो माता, दही रे संभाल्यो ओ, माखणां रे दूणी डोड़ी सींग चढे जो।
ओगा संभाल्या माता, पातरा संभाल्या ओ, पछेवड्यां रे दूणी डोड़ी सींग चढे जी।।
मुमत्तीन दूणी डोड़ी सीघ चढे जी
उठो बेटा हटीसींग कंवर हमारा ओ, पाछी ओ ल्याओ जाया कुल बहुजी।
। बहवां ओ बिना म्हारो आंगणीओ अडोलो ओ, पोतांओ बिना दादी बावलाजी ।।
सासरियै न छोड़ी माता, पिवरियै अनरोई में छोड्या राणी नै एकलाजी, नार बघेरा राणी रो भख लियो जी।।
भेजी ओ। धोला सा बलदां ओ बैल जुताया ओ, आप भाडेती ठाकुर होय रैयाजी।
उठो बेटा शिवकण, उठो बेटा देवकण, थांरा ओ दादीसा चित्तारियाजी।।
ओ ल्यो थांरो शिवकण, ओ ल्यो थांरो देवकण, म्हे ही ओ शीतरंजै पधार स्यांजी।
थाल्यां मे जीमतां ओ पातरां में जीमा ओ, कदेई न आवां सासू रै बारणै जी।।
राता म्हे पहरतां ओ धोला ओ पहरां ओ, कदेई न आवां सासू रे बारणै जी। सीतरंजै म्हे जास्यां ओ शासन दे कुवास्यां ओ, कदेई न आवां सासु रै बारणैजी।।
ढोलियै म्हे पोढ़ता ओ, धरत्यां ओ पोढंस्या ओ, कदेई न आवां सासू रै बारणैजी।
सीतरंजै म्हे जास्यां ओ, शासन दे कुवास्या ओ, कुल में ओ नांव कढ़ायस्यांजी।।
बास करै ज्यानै म्हे ही सत देवां ओ, बेला कर ज्यारै पासै रहवांजी।
तेलो करै ज्यानै म्हे ही सत देवां ओ, चौलै में औढां सुरंगी चुनड़ी जी।।
पाँच करै ज्यानै म्हे ही सत देवां ओ, छवां में पैरो छल्ला मुनडी जी।
सात करै ज्यानै म्हे ही सत देवां ओ, अठाई में आटुं कर्म क्षय कर्या जी।।
पखवाडो (आधीमासी) करै ज्यानै म्हे ही सत देवां ओ, महिने में मोक्ष दबवाका द्वारिका जी।।