गुरु वानणरी
गुरू. वानणरी. घणी रे. खाड़,
म्हें. तो शहर. सतरंज में जायस्यांजी,
माता मोरादेवी रा नन्द, म्हें तो आदिनाथ स्वामी न बांधस्याजी.
पोलीड़ा रे पोल उगाड़, म्हें तो घणा रे उमाय आयीयाजी. आंवतंड़ा घणा बूठा छ मेंव, हरिया लोए सावनओलरोजी, ओलरियां घणा बरसा छ मेंव,म्हारै मोतीड़ालड़लांगीयाजी
॥१॥ गुरु बानणरी घणी रे खाड़, म्हैं तो शहर गिगनारा में जांयस्यांजी, माता सेवा देवी रा नन्द, म्हैं तो नेमीनाथ स्वामी न बांधस्याजी,
पोलीड़ा रे पोल उगाड़ म्हैं तो घणा रे उमाय आयीयाजी, आंवतड़ा घणा बूठा छा मेंव,हरियालोए सावन ओलरोजी, ओलरियां घणा बरसा छ मेव, म्हारै मोतीड़ा लड़ लागीयाजी॥२॥
गुरु बानणरी घणी रे खाड़, म्हैं तो शहर फलोदी में जायस्यांजी, माता वामा देवी रा नन्द, म्हैं तो पार्श्वनाथ स्वामीन बांधस्यांजी, पोलीडा रे पोल उगाड़ म्हैं तो घणा रे उमाया आयीयाजी, आंवतड़ा घणा बरसा छ मेंव, हरियालीए सावन ओलरोजी, ओलरिया घणा बरसा छ मेंव, म्हारे मोतीड़ा लड़ लागीयाजी ।।३।।
गुरु बानणरी घणी रे खाड़, म्हें तो शहर पावापुरी में जायस्यांजी माता त्रिशला देवी रा नन्द,
म्हें तो महावीर स्वामी न बांधस्यांजी बांधतड़ा घण बूठा छ मेंव हरियालोए सावण ओलरोजी,
ओलरिया घण बरसा छ मेंव, म्हांरे मोतीड़ा लड़ लागीयाजी । ॥४॥
गुरु बानणरी घणी रे खाड़, म्है तो सरदार शहर में जाय स्वांजी माता नेमा देवी रा नन्द म्हें महाश्रमण स्वामी न बांधस्यांजी पोलीड़ा रे पोल उगाड़, म्हैं तो घण रे उमाया आयीयाजी.
आँवतड़ घणा बूठा छ मेंव हरियालोए सावन ओलरोजी ओलरिया घणा बरसा छ मेघ म्हारे मोतीडा लड़ लागीयाजी ॥५//