(लय-बता मेरे यार सुदामा रे)
ये मिलते नहीं दोबारा रे करो मात पिता की सेवा-2
मात पिता हो रूप हरी का,
पार उतरन का सही तरीका
यौ वेद पुराण, पुकारया रे२,
करो मात पिता की सेवा ये मिलते रे –
ये जिदंगानी बस दस दिन की
करे कदर ना जो नर इनकी-2
क्यूं फिरता मारा मारा रे
करो मात पिता की सेवा ।
जितने तीर्थ दुनिया भर में
सबके सब है अपने घर मे
बहे आंनद की धारा रे।
करो मात पिता की सेवा
ये मिलते नहीं दुबारा रे
करो मात पिता की सेवा-2
रामधन नजै चाहवे सुख न्यारा
रहिये मात पिता का प्यारा-2
करो मात पिता की सेवा
यो गुरु, नेसमझाया रे,
करो मात पिता की सेवा-2
ये मिलते नहीं दोबारा
करो मात पिता की सेवा