(लय- अजीब दास्तां है ये)
पा दरश आपके गुरुवरम्
महका है गंगा जल सा ये मन
कैसे करें अभिव्यक्ति भावों की
आये है सौभाग्य शाली क्षण ।
उठतेजपे, चलते जपे गुरु हीशाम भोर है
गुरु बुद्धि, गुरु चित ,गुरु मन विभोर है,
गुरु रात्रि, गुरु दिवस, गुरू स्वपन शयन है
गुरू काल, गुरु कला गुरु मास अयनहै
गुरु शब्द, गुरु अर्थ गुरू ही परमार्थ है
गुरु कर्म ,गुरु भाग्य गुरु ही पुरुषार्थ है
गुरु स्नेह गुरु श्रद्धा गुरु ही अनुराग है
गुरु चमन ,गुरु कुसुम, गुरु ही पराग है
गुरु भक्ति, गुरु शक्ति ,गुरु ही विज्ञान है
गुरु संयम, गुरु त्याग गुरु तत्व ज्ञान है
गुरु स्वर्ग ,गुरु मोक्ष, गुरू परम साध्य है.
गुरु जीव, गुरु ब्रह्म, गुरु ही आराध्य है