Aayo Jain Jagat Ro Pramukh Parv Samvatsari Re (paryushan)

महापर्व – संगान

(लय- माता सीता की गोदी में हनुमत डाली मूदंडी)
आयो जैन-जगत रो प्रमुख पर्व संवत्सरी रे । 
छायो सकल संघ में रंग, धर्म-जड़ हरी भरी रे ।।
पर्यूषण पर्व नाम कहायो, भाद्रव महिनो सदा सुहायो, नियमित धवल पक्ष निरमायो, प्रायः पांचम रो दिन पायो । आयो जैन जगत रो प्रमुख पर्व संवत्सरी रे ।।
लाखां लोग आज उपवासी, पौषध पचख्या वा पचखासी रात्री-दिन छिन-छिन जिन ध्यासी ।
 पल-पल जीवन सफल बितासी, समाज घरोघरी रे ।। 
आयो जैन…।।।
पुर-पुर संघ अभंग मिलासी,मंजुल मंडप सो खिलज्यासी, श्रमण-सती व्याख्यान सुणासी । 
अर्हत्-मत री आज बजासी, मधुरी बांसुरी रे ।। 
आयो जैन…।।॥२॥
सदिया भदिया सब मिल ज्यासी, कदिया पिण करतूत दिखासी, गुरु-चरणां निज अंग झुकासी ।
हिल-मिल धार्मिक ज्योति जगासी, देश दिशावरी रे । आयो जैन
सांय सुबह प्रतिक्रमण करासी, जीवा जोणी लख चौरासी, हार्दिक भावे खमत खमासी । तज मन-मच्छरता बण ज्यासी, आज अमच्छरी रे । आयो जैन…।॥४॥
जीवन सिंहालोक लहासी, वार्षिक विवरण हृदय बतासी, निज-निज खलना खोड मिटासी ।
‘तुलसी’ संत सदा वर्षासी, पावस री झरी रे । 
आयो जैन…।।।।

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