चन्दनवाला की ढाल
(लय : जिया बेकरार है..)
जिया बेकरार है, हृदय की पुकार है।
आ जाओ महावीर प्रभु, तेरा इंतजार है।। ध्रुव ।। राजकन्या है दधिवाहन की, महलो की मतिहारी हो।
तीन दिवस से पड़ी अकेली, कर्मों की गति भारी हो।
कोई न पूछनहार है, नहीं किसी से प्यार है ।।१ ।।
हाथ पांव में पड़ी बेड़िया, सिर तो मुण्डित सारा हो।
तन पर नहीं चीर कुछ भी, लज्जा को निहारा है।
भूख तो अपार है, दिखता नहीं आहार है ।।२।।
तेलें का तो आज पारणा, आवे कोई मुनिराज हो।
उड़दो के तो है बाकुले, यही भावना भाई हो।
सुपात्र सत्कार है, देऊ यही आहार है ।।३।।
इतने में ही आये वीरजी, रोम रोम हर्षाया हो।
पाछे पगा ही मुड़े विरजी, दुखिया दिल दुःखाया हो। बहती आंसुधार है, तेरा ही आधार है ।।४।।
लिया प्रभु ने आहार गगन में, बजी दुन्दु भी भारी हो।’ हुआ अभिग्रह पूर्ण प्रभु का, आश सती ने धारी हो।
चन्दनबाला नार है जिसका हुआ उद्धार है.