Jap Sadhna Vidhi

जप साधना विधि
१. वन्दे अर्हम. वन्दे जिनवरम्, वन्दे गुरुवरम् से प्रारम्भ ।
२. दिसा पूर्वाभिमुख, उत्तराभिमुख या ईशानकोण ।
३. एकान्त तथा मक्खी मच्छर रहित स्वच्छ स्थान।
४. शस्त्र श्वेत या हल्के रंग के हो। आसन खद्दर या ऊनी।
५. नियत आसन (पद्यासन, सिद्धासन या सुखासन) में बैठकर नासाग्र या भृकुटि पर ध्यान केन्द्रित।
६. नियत स्थान तथा नियत समय (पश्चिम रात्रि, प्रातः शौचनिवृत्ति के बाद या पूर्व रात्रि)।
७. लयपूर्वक, शुद्ध उच्चारण और मंत्र जप के प्रति दृढ़ आस्था, आभ्यन्तर पवित्रता और परम प्रीतिभाव।
८. गरिष्ठ पदार्थों का वर्जन। ब्रह्मचर्य व्रत का पालन।
९. प्रारंभ व समापन में उपवास, एकासन या आयंबिल।
१०. जप के समय माला का स्पर्श जमीन से न हो, 
दायां हाथ हृदय के पास रहे व माला अनामिका अंगुली पर हो तथा मध्यमा व अंगुष्ठ से एक-एक मणके को खिसकायें। (प्लास्टिक माला का वर्जन करें)।
११. दैनिक जप की संख्या समान तथा निरंतरता बनी रहे।
मंत्र-साधना
विशिष्ट अक्षरों के संयोजन का नाम मंत्र है। मंत्र अपने ध्वनि संघर्ष के द्वारा विविध शक्तियों को आकर्षित करता है। कुछ मंत्र एकान्त आत्म-विजय में सहायता करते हैं और कुछ मंत्र भौतिक शक्तियों का आह्वान करते हैं. किन्तु हमारा उद्देश्य आत्म शुद्धि का रहना चाहिए।
१. मंगल मंत्र-
ॐ अ-सि-आ-उ-सा नमः।
(यह नमस्कार मंत्र के पाँचों पदों का बीज मंत्र है। इसकी रोज एक माला फेरें)
२. ग्रह के अनुसार महामंत्र का जप-
ॐ ह्रीं णमो अरहंताणं
– चन्द्र और शुक्र
ॐ ह्रीं णमो सिद्धाणं
– सूर्य और मंगल
ॐ ह्रीं णमो आयरियाणं
– गुरु (बृहस्पति)
ॐ ह्रीं णमो उवज्झायाणं
– बुध
ॐ ह्रीं णमो लोए सव्वसाहूणं-शनि, राहु व केतुमंत्र साधना
३सुख शांति मंत्र-
ॐ ह्रीं श्री अ-सि-आ-उ-सा सर्व-विघ्न रोगोपद्रव-विनाशनाय मम ग्रहशान्तिं कुरु कुरु स्वाहा।
(ग्रह जाप सुबह शाम २७ बार करना चाहिये।)
४.पाश्व स्तुति मंत्र 
ॐ ह्रीं श्रीं अर्हं श्री-चिन्तामणि-कामधेनु-कल्पवृक्ष-पुरुषादानीय-श्रीपार्श्वनाथ-धरणेन्द्र-प‌द्मावती-सहिताय मम मनोवांछितं पूरय पूरय जय-विजय करणाय नमः।
(उपवास सहित पोषबदी १० को यह जाप प्रारम्भ किया जाता है। प्रतिदिन २७ बार जप करना चाहिए।)
५. संकट निवारक मंत्र-
ॐ अ-भी-रा-शि-को नमः।
(इस मंत्र की माला से भूत-प्रेतजनित कष्ट बहुत जल्दी दूर होता है। यह मंत्र आज भी अपना चमत्कार दिखाता है। इसमें पाँच घोर तपस्वियों की स्तुति है)
६. सर्व विध्ननिवारक मंत्र-
नमिऊण असुरसूर-गरुल-भुयंगपरिवंदिए गयकिलेसे। अरिहे सिद्धायरिए उवज्झाए सव्वसाहू य ।।
७ गौतम-स्तुति (सुख-शान्तिवर्द्धक मंत्र)
ॐ नमो भगवओ गोयमस्स सिद्धस्स बुद्धस्स अक्खीण-महाणसस्स भगवन् ! मम मनोरथं पूरय पूरय स्वाहा ॥
८. चमत्कारी मंत्र “ॐ भिक्षु”
(यह मंत्र श्रद्धावान् लोगों के लिये महामंत्र का कार्य करता है। इसका सवा लाख जप करने से अवश्य चमत्कार होता है। प्रारम्भ भादवा सुदी तेरस या दीपावली से करें।)
९. रिद्धि-सिद्धि वर्धक मंत्र-
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ब्लू अर्हं नमः। (त्रिकाल एक माला जपने से सब कार्य सिद्ध होते हैं।)
१०. सर्व मंगलकारी मंत्र-
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ह्रीं नमः। (प्रातः प्रतिदिन एक माला)
११.   सप्ताक्षरी मंत्र 
      ॐ ह्रीं  श्रीं अर्हं नमः।
(प्राचीन प्रभावी मंत्र समृद्धि और स्मृति संवर्धक है।)
१२.    ॐ ह्रीं  नमः।
(४२००० बार या ५००० बार ७ दिनों में)
१३ रोग निवारक मंत्र 
संती कुंथु अरहो, अरि‌टठनेमी जिणंदपासो य समरंताणं णिच्चं, सव्वं रोगं पणासेइ ॥
१४.   शरीर रक्षा मंत्र 
  ॐ नमो भगवते श्रीपार्श्वनाथाय सर्व दुरित अपहर-अपहर अजिते अपराजिते महाबले मम शरीरं रक्ष-रक्ष हुं फट् स्वाहा।
(प्रतिदिन २१ बार या एक माला जप करना चाहिए।)
१५. रोगनाशक मंत्र-
 क्लौं क्लौं अर्ह नमः।
(त्रिकाल एक माला)
1६. क्रोध ( आवेश )मुक्ति मंत्र-
ॐ शान्ते प्रशान्ते सर्वक्रोधोपशमनी स्वाहा।
 (प्रतिदिन एक माला)
१७. भय मुक्ति मंत्र-
ॐ णमो अभयदयाणं। (प्रतिदिन एक माला)
१८. ज्ञान प्राप्ति मंत्र
ॐ णमो अरिहं वद वद वाग्-वादिनी स्वाहा।
 (प्रतिदिन एक माला)
१९. ज्ञान वृद्धि मंत्र-
ॐ णमो नाणस्स। (प्रतिदिन एक माला)
२०. विघ्न निवारक मंत्र-
ॐ ह्रीं भगवते श्रीपार्श्वनाथाय क्षेमंकराय ह्रीं नमः। (त्रिकाल एक माला)
२१. तनाव मुक्ति मंत्र-
ॐ ह्रीं श्रीं भगवते पार्श्वनाथाय हर हर स्वाहा।
वैर शमन मंत्र-
(प्रतिदिन एक माला)
 ॐ ह्रीं श्रीं देवदत (व्यक्ति का नाम लें)साध्य साधय ॥
(२१ दिन तक रोज एक माला)
यात्रा प्रारम्भ  पूरव स्मरण मंत्र-
ॐ फुं क्ष्वीं ह्रीं ऐं नमः ठः ठः ठः स्वाहा।
(२१ बार जपें फिर मुख पर हाथ फेरकर प्रस्थान करें।)
२४. सर्वशान्तिकरण मंत्र-
ॐ नमो शान्तिनाथाय, सर्वशान्तिकराय, सर्वविघ्नप्रणाशनाय, सर्वरोगापमृत्यु विनाशनाय, सर्वपरकृत क्षुद्रोपद्रव विनाशनाय, झ्रौं वं मं हं सं तं यं क्षीं हं सः अ सि आ उ सा मम सर्वशान्तिं कुरु कुरु स्वाहा।
(इस मंत्र का सुबह सायंकाल कम से कम २१ बार जाप अवश्य करें। इसके जाप से विघ्न, रोग, परकृत क्षुद्र उपद्रवों आदि का उपशमन होता है और सब प्रकार की शांति स्थापित होती है।)
श्रीचिन्तामणी पार्श्व स्तुति
कल्पबेल चिन्तामणी कामधेनु गुण-खान । 
अलख अगोचर अगम गति, चिदानन्द भगवान ।।
परम ज्योति परमात्मा, निराकार अविकार । 
निर्भय रूप ज्योति स्वरूय, पूरण बह्य अपार ।।
अविनाशी साहिब धणी, चिन्तामणी श्री पास । 
अर्ज करूं कर जोड़ के पूरो वांछित आस ॥
मन चिन्तित आशा फले, सकल सिद्धि हो काम । चिन्तामणी को जाप जप, चिन्ता हरे यह नाम।।
तुम सम मेरो को नहीं, चिन्तामणी भगवान् । 
‘चेतन’ की यह वीनती, दीजै अनुभव ज्ञान।।
मंत्र सिद्धि का फलित
आत्म-विशुद्धि और ऊर्जा विकास का संवर्धन। 
भय से मुक्ति और मनोबल का विकास।
रोगों से छुटकारा, आरोग्य की प्राप्ति।
मानसिक धैर्य और एकाग्रता की वृद्धि।
व्यवहार में सहजता और सरलता।
आत्मोन्मुखी बने रहने का स्वभाव।

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