Koti Jap Anushthan

कोटि जप अनुष्ठान
(नमस्कार महामंत्र के सवा करोड़ जप का अनुष्ठान) (९०८ व्यक्तियों द्वारा १०८ दिन प्रतिदिन पांचों पदों
की अलग-अलग ११ माला फेरने पर)
प्रारंभ आषाढ़ शुक्ला १४
समापन   कार्तिक शुक्ला २
माला.   प्रतिदिन कुल ५५ माला
दिशा.  उत्तर या पूर्व
नियम 
१. चीनी की मिठाई या नमक या ग्यारह द्रव्यों उपरान्त त्याग। (पारणे में अपवाद)
२. प्याज एवं लहसुन का वर्जन।
३. पान पराग आदि मसाला, जर्दा एवं धूम्रपान का वर्जन।
४. अश्लील शब्दों के प्रयोग का वर्जन।
५. ब्रह्मचर्य का पालन।
(• जिस पद के साथ जो रंग है उसी रंग की माला से उस पद का जाप करें। जप एक बार या अधिक से अधिक पांच बार में सम्पन्न किया जा सकता है। यात्रा आदि में, वाहनों में भी यह जप अनुष्ठान किया जा सकता है।)
विधि
ॐ ह्रीं णमो अरहंताणं स्थान: ज्ञानकेन्द्र (चोटी का स्थान)
रंग: सफेद (पूर्णिमा के चन्द्रमा के समान)
ॐ ह्रीं णमो सिद्धाणं
स्थान: दर्शनकेन्द्र (दोनों भृकुटियों के बीच)
रंग: अरुण (उगते सूरज के समान)
ॐ ह्रीं णमो आयरियाणं
स्थान : विशुद्धिकेन्द्र (कंठ का मध्य भाग) रंग: पीला (सरसों के फूल के समान)
ॐ ह्रीं णमो उवज्झायाणं
स्थान : आनंद केन्द्र (दोनों फेफड़ों के बीच का गड्ढा) रंग: हरा (पन्ने का रंग)
ॐ ह्रीं णमो लोए सव्वसाहूणं
स्थान : शक्ति केन्द्र (पृष्ठ रज्जु का अंतिम छोर) रंगः नीला (मयूर के कण्ठ के समान)

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