(तर्ज-आधा है चन्द्रमा)
करता हूँ वंदना मोक्षगागी रह न जाये कोई मेरी साध स्वामी प्रभु पाश्र्व स्वामी
मै तो आया हूँ आश लगाके, अब जाऊंगा दर्शन पाके
मेरे प्यासे नयन
केसे हो गये मगन, बिन दर्शन तेरे त्रिभुवन स्वामी
तेरे चरणों में शीश झुकाके, करू वन्दन मैं तेरे गुण गाके तू है तारण तरण मुझे देदो शरण, मेरे कष्ट हरो अन्तर्यामी
तेरे जनम -२ के पुजारी, दरपे आये है बनके भिखारी
प्रभु दर्श दिखा, अब पार लगा हैअब जाऊगा दर्शन पाके है येमित्र मंडल की पुकार स्वामी