(लय – झिलमिल सितारो का आंगन )
मुनिवर आपकी देख विदाई ,आंखों में सबके आज रूलाई-2
नगरी के कण-कण में देखो गहन उदासी छायी,
मुनिवर आपकी देख विदाई
खाते-पीते-2 होहोहो,सोते- उठते यादआपही आओगे
पूछ रहे हमसब मुनिकर हम सबको भूल न जाओगै
आना फिर जल्दी वापस ओ राही
मुनिकर आपकी देख विदाई हो
गाँव नगर मे-2होहोहो, विहरण करते , फिर पधराना
नीर पिला कर इस बगिया को फिर से सरसाना
कैसी ये बेला है दुखदायी
श्रावक गण की सूरत देखो कैसी है मुरझायी
मुनिवर आपकी देख विदाई