प्रातः स्मरणीय गीत
रचयिता शासन श्री साध्वी सोमलता जी
लयः कितना बदल गया
प्रातः उठ परमेष्ठी वंदन करूं सदा निष्काम
शांति रहेगी आठों याम ।। सदा।।
ऋषभ अजित संभव अभिनंदन, सुमति पद्म प्रभु पाप निकंदन।
नाथ सुपार्श्व चंद्रप्रभु सुविधि, शीतल प्रभु से चाहूं सिध्यि। समरूं नित श्रेयांसदेव अरू वासुपूज्य अभिराम 11111
विमल अनंत धर्म सुखकारी, शांति कुंथु अर अरिष्टहारी। मल्लिनाथ मुनिसुव्रत स्वामी, नमीनाथ नेमी जगनामी। वामानंदन पारस जिनवर महावीर महानाम ।।2।।
अर्हत सीमंधर युगमंधर, बाहु सुबाहु सुजाती जिनवर। स्वयंप्रभु ऋषभानन ध्याऊँ, अनंतवीर्य को शीश नमाऊं। सूर विशाल जिनेश्वर हैं भक्तों के तिलक ललाम ।।३ ।।
चन्द्रबाहु चंद्रानन विभुवर वज्रधरेश भुजंग अधीश्वर । ईश्वर नेमीप्रभु शुभंकर, वीरसेन महाभद्र ज्योतिधर। देवयशेश्वर अजित विहरमानों को कोटि प्रणाम ।।4।।
गौतम व्यक्त सुधर्मा गणधर, मंडित-मौर्यपुत्र महिमाधर। अचलभ्रात मेतार्य मुनीश्वर, अग्निभूति प्रभास प्रभाकर। वायुभूति अकम्पित-सुमिरन, हरता कष्ट तमाम ।।5।।
ब्राह्मी सुंदर चंदनबाला, कौशल्या सीता गुणमाला। कुंती सुलसा मृगावतीजी, शिवा द्रौपदी राजमतीजी। पद्मा चूला प्रभा सुभद्रा दमयन्ती सुखधाम ।।6।।
भिक्षु भारमल भाग्यविधाता, रायचन्द्र जयजश जगत्राता। मघवा माणक डालिम गुरूवर, कालू तुलसी महाप्रज्ञ वर। महातपस्वी महाश्रमण से पायें नव आयाम 11711
तीर्थ धाम तेरापथ प्यारा, हम सबकी आखों का तारा। जब तक सूरज तपे गगन में,तब तक खुशबू रहे चमन में। मुख्य मुनि हनुमान संघ के महाश्रमण श्री राम ।।8।।
थे गलूंड के अमीचंदजी, रोयट के मुनि भीमचंद जी। सूरवाल के राम तपस्वी, लावा के शिवचंद यशस्वी। नमन करूं बड़नगर धरा के तपसी कोदर स्वाम 11911
श्री सरदार गुलाब शान है, नवलां जेठां सती कान है। महासती झमकू लाडांजी, शासनमाता कनकप्रभाजी। सहज समर्पित विश्रुतविभाजी,हैनवमा साध्वीप्रमुखाजी। ‘सोमलता’ गुरू-गुण-उपवन में रमण करू अविराम 10।।