(तर्ज : बाबूल का ये घर)
शासन मां से मिलने को तपस्या का बहाना है ।
ऊँचे-2 पर्वतों पर मेरी माता का ठिकाना है ।।
गिरनार में ढूंढा तूझे, तो नेमीनाथ को पाया है।
गुजरात की पहाड़ियों में, मेरी शासन(माता) का ठिकाना है ।
सुरज में ढूंढा तो चंदा में पाया है ।
तारों के टिम टिम में मेरी शासन (माता )का ठिकाना है
पावापुरी में ढूंढा तो. महावीर को पाया है ।
राजगृही के पहाड़ियों में मेरी
रणकपुर में ढूंढा तो, आदिनाथ को पाया है।
अरावली की पहाड़ियों में मेरी..
विश्व भारती में ढूंढा तो, मेरे गुरु वर को पाया है ।
आज तपस्वी के जीवन में शासन माता का ठिकाना है