मेरा रंग दे बसंती चोला
मेरा रंग दे बंसती चोला माहे रंग दे बसंती चोला
जिस चोले को पहन शिवाजी खेले अपनी जान पे,
जिसे पहन झाँसी की रानी मिट गई अपनी आन पे
आज उसी को पहन के निकला
हम मस्तों का टोला मेरा रंग दे
दम निकले इस देश की खातिर बस इतना अरमान है।
एक बार इस राह पे चलना सौ जन्मों के समान है।
देश के वीरों की कुरबानी,
अपना दिल भी बोला। मेरा रंग दे ..।२।
बड़ा ही गहरा दाग है यारो, जिसका गुलामी नाम है। उसका जीना भी क्या जीना, जिसका देश गुलाम है।
वीर वही संगीन के आगे जिसने सीना खोला।
मेरा रंग से …।३।
हाथ में गीता, गले में फाँसी, मन में यह उद्गार हो।
जिस धरती पर मिदूँ उसी पे जन्म अनेकों बार हो।
चाहे जब भी जन्मू लेकिन मिले बसंती चोला। मेरा रंग दे