अक्षयतृतीया
अक्षय तृतीया का सुपावन आया पर्व महान
संदेशा साधना का, तपकी आराधना का ।
माँ मरुदेवा के नन्दन प्यारे, पहले तीर्थंकर कुल उजियारे असि मसि कृषि का पाया जगति ने तुमसे ज्ञान,
सन्देशा-
मुक्ति का का पथ अपनाया छोड दिया राजपाट को
एक बरस तक धूमे आहार न मिला सम्राटको
उस युग की जनता सारी भिक्षावृति से अनजान
सन्देशा-
3 प्रप्रोत्र श्रेयांस ने ही पारणा कराया अहोभावसे
प्रथम दान देने वाला धन्य हुआ सदभाव से ।
दिवस आज का था वह उत्तम इक्षुरसका दान
सन्देशा-
देव बजाते दुन्दुभि दिव्य नजारै छा गये
आज भी तपस्वी आदीश्वर बाबा के गुण गारहे
ज्ञानशाला के बच्चे करते भावों से सम्मान !.