(लय- भिक्षु स्वामी अंतर्यामी करदयो बेड़ा पार)
गणपति आओ कृपा कराओ आय विराजो पाट
आपरो के कहणो आपरो ही शरणो
कुमकुम थाल सजाया, अक्षत अक्षय ल्याया हा
घी रा म्हे दीपक लाकर मोतीयन चौक पुराया हा
म्हारे आँगण शीघ्र पधारो,
मन का सगला कारज सारो
आकर करो निहाल
आपरो ही शरणो
मोदक रो म्हें, भोग लगावां थाने चाव स्यूं
आरती करां मै भगवन्, विनती रे सच्चे भाव स्यूं
छोटा छोटा पगल्या धरता, मूसे री असवारी करता
रिद्धि सिद्धि धन बरसाओ ,आपरो ही शरणो
भैरू बाबा ने संग में, लाई ज्यो थे घणेमान स्यूँ
अंजनी के लाल ने अर्ज करी ज्यो सम्मान स्यू,
माताजी भी संग में आवै, लक्ष्मी वैभव गंगा लावै
देवी देवता ठाठ लगावे
आर्शीवाद दिराओ आपरो ही शरणो