करती हूँ वन्दना मोक्षगामी
(तर्ज : आधा है चन्द्रमा रात आधी)
करती हूँ वन्दना मोक्षगामी। रह न जाये कोई मेरी साध स्वामी। प्रभु पार्श्व स्वामी ।।
मैं तो आई हूँ आस लगा के, अब जाऊँगी दर्शन पा के। मेरे प्यासे नयन होवे कैसे मगन-2 बिन दर्शन तेरे त्रिभुवन स्वामी, करती हूँ… ।।
तेरे चरणों में शीश झुका के, करूँ वंदन तेरे गुण गा के तू है तारण-तरण, मुझे दे दो शरण मेरे कष्ट हरो अन्तर्यामी, करती हूँ…।।
तेरे जन्म जन्म के पुजारी, दरपे आये है बन के सवाली प्रभु दरश दिखा, अब पार लगा-2 है ये शान्ति मण्डल की पुकार स्वामी, करती हूँ…।।
पारस प्यारा लागो
पारस प्यारा लागो शंखेश्वर प्यारा लागो
थाँकी वोकडली झाड्या मे रस्तो भूल्वो म्हारा पारस जी मैं रस्तो कईयां पावाँला….
अब डर लागे है म्हाने हर वार पुकारा थाने थाँका पर्वत का जंगल में सिंह धड़के म्हारा पारस जी …2
मैं रस्तो कईयां पावोला थे राग द्वेष ने त्यागो मैं आवो भाग्य भाग्या थाँका पर्वत से भाटा की ठोकर लागे म्हारा पारस जी मैं रस्तो कईयां पावाँला….
मैं दूर देश थी आव्या, थोका ऊँचा देख्या माल्या म्हाने पेयया चढ़वो प्यारो लागे म्हारा पारस जी मैं रस्तो कईयां पावाँला….
थााँका विशाल दर्शन पाया, जद तन मन सू हरषाया थााँकी छतरी की तो शोभा न्यारी हो म्हारा पारसजी मैं रस्तो कईयां पावाँला….
थे झूठ बोलवो छोड़ो, धर्मां सूं नातो जोडो म्हांकी वांकडली झाड्यो में आओ म्हारा सेवकजी थें सीधे रस्ते आवोला
पारस प्यारा लागो शंखेश्वर प्यारा लागो