लय-
पागडल्या रा पेच ईशर जी ढीला-२ लागे-2, –
तो कुणा लागे शीश झुकायो ईसरजी देर कठोड़ लगाई-2
मै छा ए गोरल सुसरा रा जंवाई
तो बांके आगे शीश झुकायो, नखराली देर बठोड़े लागे
आंख्या रो काजल ईसर जी फीको फीको
लागे
तो कुण सामी नजर झुकाई, बादीला देर कठोड़ लगाई
म्हे छाए गौरल साला रा बहनोई – 2
तो बांके सामी नजर झुकाई
नखराली देर बठोड़े लगाई
दांता री बतीसी ईशर जी मेली-2 लागे
तो कुणा साग बात बणाई
म्हे छाए गौरल साल्या रा बहनोई
तो बाके साग बात बणाई
आज थे गया ईशर जी फेर मत ज्याजो -2
थांके म्हाके हुवली लड़ाई
2.गणगौर गीत
( लय – वारि जाऊ चिरमी ने)
धन धन म्हारो भाग है, कोई मनड़ों करे किलोल-२
गवरल आई रे
१.घर घर वंदन वार बजे ,श्रद्वारा मन भाव जगै
उगते सूरज लाइयो-2 कोई गवर पूजनता रा बोल
धन धन म्हारो भाग है
२.गली-२ घुड़लो घूमे, लोग लुगाया सब झूमे
घूमर घानले नाचे है, टाबरिया हरखे झूमे
ताल तलाया पर मची, कोई, कोई सागीडो रमझोल-2 गवरल आई रे
धन धनम्हारो भाग है,
कोई मनडो करे किलोल
३.ए तींवार जद भी आवे, मानस दुखड़ा बिसरावें
हिल मिल कर वंदन गावे, भेद भाव सब मिट जावे
वेर भाव विसराय दे, कोई मीठी वाणी बोल
कोई गवरल आई रे ,धन धनम्हारो भाग है,
कोई मनडो करे किलोल
मनड़ो तो हरख्यों डोले, मातारी जय जयबोले आशारा नवदीप जले, नव उमंग रा सुर बोले
अन धन देसी मोकलो कोई धन अनमोल गवरल आई रे
धन धनम्हारो भाग है,
कोई मनडो करे किलोल