Baje Kundal Pur Me Badhayi

बाजे कुण्डलपुर में बधाई

बाजे कुण्डलपुर में बधाई, कि नगरी में वीर जन्मे-2, महावीरजी।
जागे भाग्य हैं त्रिशाला माँ के 2
कि त्रिभुवन के नाथ जन्मे 2, महावीरजी ।।
शुभ घड़ी जन्म की आई 2, कि स्वर्ग से देव आये, महावीरजी।
तेरा न्हावण करे मेरू पर 2, कि इन्द्र जल भर लाये, महावीरजी ।।
तुझे देवियाँ झुलावे पलना 2, कि मन में मगन होके, महावीरजी।
तेरे पलने में हीरे मोती 2, कि डोरियों में लाल लटके, महावीरजी ।।
ऐसी ज्योति तेरी जागी 2, कि सूर्य चांद छिप जावे, महावीरजी।
पिता तेरे लुटावे मोहरें 2, कि खजाने सारे खुल जावे, महावीरजी ।।
हम दरश को तेरे आये 2, कि पाप सब कट जावें, महावीरजी।
बजे कुण्डलपुर में बधाई 2, कि नगरी में वीर जन्मे, महावीरजी ।।
 महावीर स्तवन
 जय बोलो महावीर स्वामी की

जय बोलो महावीर स्वामी की, घट घट के अन्तर्यामी की।। टेर।।
जिस जगती का उद्धार किया, जो आये शरण में पार किया। जिस पीड़ सुनी हर प्राणी की, जय बोलो महावीर स्वामी की। ।। ।।
जो पाप मिटाने आया था, जिस भारत आन जगाया था। उस त्रिशलानन्दन ज्ञानी की, जय बोलो महावीर स्वामी की।।2।।
जिस राज पाट को छोड़ दिया, साढ़े बारह वर्ष तप घोर किया। उस शांत वीर रस गामी की, जय बोलो महावीर स्वामी की। ।3।
जिन स्याद्वाद सिद्धांत दिया, जिसने सब झगड़ा मेट दिया। है देन सभी उस नामी की, जय बोलो महावीर स्वामी की।।4।।
जिस जीव अजीव को तोल दिया, फिर तत्त्वज्ञान अनमोल दिया। उस महामोक्ष पदगामी की, जय बोलो महावीर स्वामी की। ।5।।
हो लाखों बार प्रणाम तुम्हें, हे वीर प्रभु भगवान तुम्हें। मुनि दर्शन मुक्तिगामी की, जय बोलो महावीर स्वामी की।।6।।
Jai bolo mahvir swami ki, Ghat- ghat ke antaryami ki /
Jis jagati ka uddhar kiya, Jo aaye sharan mein paar kiya /Jis pid suni has prani ki, Jai bolo mahavir swami ki / 1/
Jo paap mitane aaya tha Jis bharat aan jagaya tha /Us trishlanandan gyani ki, Jai bolo mahavir swami ki / 2/
Jis raaj paat ko chlod diya, Barah varsh tap ghor kiya /Us shant vir ras gaami ki, Jai bolo mahavir swami ki / 3/
Jin syadvad siddhant diya, Jisne sab jhagda met diya /Hey den sabhi us naami ki, Jai bolo mahavir swami ki /4/
Jis jeev ajeev ko tol diya, Tatva gyan anmol diya /Us mahamoksha pad gaami ki, Jai bolo mahavir swami ki /5/
Ho laakh baar pranam tumhe, Hey vir prabhu bhagvan tumhe /Muni darshar muktigami ki, Jai bolo mahavir swami ki /6/

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