मेलों तपस्या रो
(लयः चालो देखण ने बाईसा)
मेलो तपस्या रो साथीड़ा, तप री झडियाँ लागी रे।
झड़ियां लागी रे क आपा भजन सुणांवा रै।।
तपसी रो तो तेज सवायो देव मुनि चकरावै रे। पाप ताप सब नाश करै है महिमा भारी रे।।
मेलो तपस्या रो….
भूखो रहणो सोरो कोनी दिन यें तारा दिख ज्यावेरे। हिम्मत वाला ही बढ़ पावै, इण मारग में रे।।
मेलो तपस्या रो…..
मोक्ष द्वार रो चोथौ पथ है आगम बात बतावै रे। तप री उजली जोत जलावण, साझ दराओ रे ।।
मेलो तपस्या रो…..
धन्य धन्य है तपसण……कुल रो मान बढ़ायो रे। सन्त सतीवर साझ दरावै तप री झड़ियाँ में ।।
मेलो तपस्या रो…..
तप रो रंग अनोखो छायो गंगाणै री नगरी में। म्हे सगलां तो भजन सुणाकर भाग सरावां रे ।।
मेलो तपस्या रो……