(लय – आलौट केआजा )
संघ उपवन में आया मधुमास
करें तपस्या का अभिनन्दन
तप गीतों से गाये गुणगान
करे तपस्या का अभिनन्दन
महाश्रमण गुरू की करुणा नजर से पावस अनूठा पाया
मीठा उपदेश देकर घर घर मे जाकर सतिवर ने हमको जगाया
हुआ घट घट में उजला प्रकाश
तपस्या से कटते जनमो के फेरे तपस्या कीताकत निराली
दुख के अंधेरे मे बांटें उजाला हरदम मनाये दिवाली
मिटे रोग शोक संत्रास ।
रंग लगा है भाग्य जगा है कली कली विकसाई
तपसी यै सारे सादर स्विकारे हम सबकी आज बधाई।
आगे 2 हो जीवन विकास