Mahavir Ji O Mahavir

महावीरजी ओ महावीर?

लय : उमरांव थांरी बोली
महावीर ! थांरा दरसण कर सुख पावां म्हारा स्वाम। महावीर ! थारे चरणां में लुल ज्यावां म्हारा स्वाम ॥ महावीरजी ओ महावीर !
१. मां त्रिशला रा लाडला, सिद्धारथ कुल नन्द, 
अन्तिम तीर्थंकर बण्या, छायो जग आनन्द । 
महावीर ! थारी महिमा कांई बतलावा म्हारा स्वाम-महावीरजी…
२. ज्ञानामृत बरसाईयो, धरती बणी सनाथ, 
लाखां जन आगे बढ्या, रह्या प्रभु सदा साथ। 
महावीर ! थारे कदमां पर बढ़ ज्यावां म्हारा स्वाम-महावीरजी…
३. ज्योतिपुंज ! हे ज्योतिर्मय ! पावां अनुपम ज्योत, पावन गंगा ज्ञान मे, मिलज्या जीवन स्रोत । 
महावीर ! मुगती री मंजिल म्है पावां म्हारा स्वाम ! – महावीरजी…
४. ‘भजन मंडल’ री सुणो, प्रभुवर ! करुण पुकार, 
संकट म्हारा काटज्यो, भरज्यो थे भण्डार । 
महावीर थारे शरण में आवां म्हारा स्वाम ! – महावीरजी…

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