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धर्म प्रभु स्तवन
अहो प्रभु परम देव प्यारा।
1. धर्म जिन धर्म तणा धोरी, त्रटक मोह-पाश नाख्या तोड़ी। चरण-धर्म आतम से जोडी, अहो प्रभु परम देव प्यारा ॥
2. शुकल ध्यानामृत रस लीना, संवेग रसे करि जिन भीना। प्याला प्रभू उपशम ना पीना, अहो प्रभु परम देव प्यारा ॥
3. जाण्या शब्दादिक मोहजाला, रमणि-सुख किंपाक सम काला। हेतु नरकादिक दुख आला, अहो प्रभु परम देव प्यारा॥
4. पुद्गल सुख अरि जाण्या स्वामी, ध्याने थिरचित आतम-धामी। जोड़ी युग केवल नीं पामी, अहो प्रभु परम देव प्यारा ॥
5. थाप्या प्रभु च्यार तीरथ तायो, आख्यो धर्म जिन आज्ञा मांह्यो। आज्ञा बारै अधरम दुखदायो, अहो प्रभु परम देव प्यारा ॥
6. विरत धर्म धर्म-जिनंद ख्याता, अव्रत कही अधरम दुख दाता। सावद निरवद जू जूआ कह्या खाता, अहो प्रभु परम देव प्यारा ॥
7. बहुजन तार मुक्ति पाया, उगणीसै आसू धुर दिन आया। धर्म जिन रटवै सुख पाया, अहो प्रभु परम देव प्यारा ॥
लय : भीखू पट भारीमाल भलकै