तर्ज :- (दिल लूटने वाले जादूगर)
हे त्रिशला नन्दन भव दुःख भंजन, वीर नाम ही प्यारा है,
हम दुःखियारों को तेरे ही, चरणों का एक सहारा है ।
ये छोटा बालक जान, इन्द्र मन में यूं ही भरमाया था,
तब शंशय दूर किया प्रभु ने, मेरु गिरी को थर्राया था,
ये अदभुत लीला देख सभी ने, जय जय नाद उचारा है ॥ १
॥ हे त्रिशला ॥
भटके चौरासी लाख कहीं, ये नर तन सुन्दर पाया है.
देखे दुनिया के रंग ढंग, कहीं धूप और कहीं छाया है,
शुभ कर्मों से झोली भर दो, तेरे बिन कौन हमारा है ॥ २
॥ हे त्रिशला ॥
ये “वीर मंडल” तो सुबह शाम, बस जपता नाम तुम्हारा है.
इक नजर महर की हो जाये, तो बेड़ा पार हमारा है,
कर जोड़ करें हम नमस्कार, तँ (TU)जग से तारण हारा है ॥ ३
॥ है त्रिशला ॥