,(लय-दिल लूटने वाले जादूगर)
यदि क्रोध तुम्हारा कम न हुआ तो,तप का सिर झुक जाएगा,
यदि अहम् हमारा सम न हुआ, तो तप फिर धोखा खाएगा।
यदि क्रोध तुम्हारा कम न हुआ तो तप का सिर झुक जाएगा।
1
. तप उतर जाये आचारों में, जीवन के हर व्यवहारों में, बदली नहीं-2 जीवन की धारा, तप करके भी क्या पाएगा। यदि क्रोध तुम्हारा कम ना हुआ, तो तप का सिर झुक जाएगा।।
2. तप हो न ज्ञान शून्य तेरा, टूटे अंतर का अंधेरा, यदि समता – 2 छुन सकी मन को तप खुद पर ही पछतायेगा यदि क्रोध तुम्हारा कम ना हुआ तो तप का सिर झुक जाएगा ।।
3
. तप से बदले तन- मन जीवन, तप से टूटे बंधन, क्रन्दन, फिर आत्म-2 रमण की राहों में, तप खुद प्रकाश फैलायेगा। यदि क्रोध तुम्हारा कम ना हुआ तो, तप का सिर झुक जायेगा।।
4.
तप आत्मशुद्धि का दाता है, तप जीवन का निर्माता है, जितने गहरे – 2 तुम उतरोगे, तप उतना ही गहरायेगा। यदि क्रोध तुम्हारा कम ना हुआ तो तप का सिर झुक जाएगा।