अरुण यह मधुमय देश हमारा
जयशंकर प्रसाद यह गीत जयशंकर प्रसाद द्वारा लिखा गया है। इसे उनकी अमर कृति ‘भारत महिमा से लिया गया है। इस प्रसिद्ध गीत को 12 अलग-अलग धुनों में संगीतबद्ध किया जा चुका है।
अरुण यह मधुमय देश हमारा ।
जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा ।।
सरल तामरस गर्भ विभा पर, नाच रही तरुशिखा मनोहर। छिटका जीवन हरियाली पर, मंगल कुंकुम सारा ॥
लघु सुरधनु से पंख पसारे, शीतल मलय समीर सहारे । उड़ते छग जिस और मुँह किए, समझ नीड़ निज प्यारा ॥
बरसाती आँखों के बादल, बनते जहाँ भरे करुणा जल। लहरें टकराती अनन्त की, पाकर जहाँ किनारा ॥
हेम कुम्भ ले उषा सवेरे, भरती बुलकाती सुख मेरे । मंदिर ऊधते रहते जब, जगकर रजनी भर तारा ॥
अरुण यह मधुमय देश हमारा ।