(लय – घनश्याम मुझे अपना दीदार दिखा देना)
मैं जब भी पुकारूं मां तुम दौड़ी चली आना
एक पल भी ना रुकना मेरा मान बढ़ा जाना,
नवरात्रों में मैया तेरी जोत जलाऊंगी,
जब जोत जले मैया ,आके दर्श दिखा जाना,
सावन के महीने में मां झुला डालूंगी,जब झुला
डलेगा मां ,झूलन को आजाना
फागुन के महीने में ,तेरा कलश भरआऊंगी
जब रंग घुलेगा मां, तुम खेलन आजाना
बीच भंवर में मां मेरी नैया डोल रही,
तुम आकर के मैया जरा पार लगा जाना,मै जब भी पुकारूं मां तुम दौड़ी चली आना