(तर्ज – मेरा पिया घर आया ओ रामजी …)
नखरा दिखाती आई घुघरु बजाती आई, घोड़ी मस्तानी आई रे बाजे अंगरेजी बाजा,
घोड़ी पर बैठ्यो राजा – राजा रे रानी आई रे
म्हारे बनड़े री घोड़ी है नाचनी – ४
थारी चाल सुहानी मन मोहे – थांरे छैल छबीलो रंग सोहे
नखरों पे वारी जावे – निरखने सग्यां आवे
थारो सिणगार प्यारो – थांरो ठुमको है न्यारो
चांद सुरज दरवाजे – खड़ि तूं गाजे बाजे
घोड़ी ने लाड लड़ावां – घोड़ी ने पान खुवांवां
तु मदरी मदरी चाले – गली में घूमर घाले
तु दूर देश स्यूं आई – खुशियां रा रंग लाई, नखरा
घोड़ी सिर पे किलंगी थांरे सोवे – सिणगार सज्योड़ी मन मोहे
यान पापाजी मोलावे, निरखने मम्मी आवे
सजी बारात साग, पुठरी घणी तुं लागे
समधी जी रे घर जासी, घोड़ी तुं धूम मचासी
सगोजी रे दरवाजे, सगीजी लाड लडासी
म्हार बनडे रे साथे त बनडी वर घर ल्यासी
घड़ी मधुर मिलन री आई खुशिया रा रंग ल्याई
नखरा दिखाती आई घुंघरु बजाती आई
Ghodi -2
***जरा सामने तो आवो बनासा, दरवाजे खड़ी है घोड़ीया, यू, छुपना सकेगी बछेरीयां,
इसमें शरमाने की क्या बात है।
दादाजी तुम्हारे सजे बाराती दादीजी मंगल गा रहीहै बाबाजी तुम्हारो सजे बराती बडीयाजी मंगल गा रही है इसमे शरमाने की क्या बात है, ये तो दूनियां की रीत रीवाज है। यूं छूपना सकेगी
(इस तरह घर का नाम लेना)
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Ghodi -3
(तर्ज – ये परदा हटादो …)
आ घोड़ी प्यारी लागे, सगला स्यूं न्यारी लागे २
पेहरी जीन हीरा जड़ी बी पे बालक बनड़ो साज २ … आ घोड़ी प्यारी….
विराटनगर स्यूं म्हारो बनड़ो घोड़ी एक मंगाई
दादा – दादी हरषे, पापा – मम्मी बहुत सराई २
चाव घणेरो बन्ने रा काका काकी लाड लडावे
सोनारी कुण्डी में देखो बडीया दाल चबवावे
आ घणी ही मिजाजण, आ घणी ही तेजाजण … पेहरी जीन हीरा जडी हिलमिल गावे
देखो भूवाजी राई लुण ऊंवारे
मंगल गावे बहना देखो आरती उतारे
जीन सुनहरी सोवे और किलंगी शीष पे सोवे हीरा मोत्यां स्यूं सजी आ घोड़ी मनड़ो मोवे आ घूमर घाले, आ नखरो दिखावे … पेहरी जीन हीरा …