Suhag Ke Geet

सुहाग

बनड़ो तो पुछ बनी लाडली हां ए बनी किस वीध लम्बा थांरा केश सुहाग राज बिड़ला ।
माथो तो न्हायो काच दूधस्यूं, हां ओ बना इस विध लाम्बा म्हारा केश, सुहाग
बनड़ो तो पुछ ए बनी लाडली, हां ए बनी किस विध तिखा थारा नैन, सुहाग सुरमो तो सारयो मूंग मोलरो, हां ओ बना इस विध तिखा म्हारा नैण, सुहाग
बनड़ो तो पुछ ए बनी लाडली, हां ए बनी किस विध धोला थारा दांत, सुहाग
माय खुवाया खाँडा खोपरा, हां ओ बना इस विध धोला म्हारा दांत, सुहाग बनड़ो तो पूछ ए बनी लाडली हा ए बनी किस विध राता थांरा होठ, सुहाग
बिड़ला तो चाव्या नागर बेलरा हां ओ बना इस विध राता म्हारा होठ,
सुहाग बनड़ी तो पूछ ए बनी लाडली हां ए बनी किस विध पिलो थारो गात,
सुहाग पीठी तो मसली मूंग मोलरी हां ओ बना इस विध पीलो म्हारो गात,
सुहाग बनड़ो तो पूछ ए बनी लाडली हा ऐ बनी किस विध पायो एसो श्याम,
सुहाग निरणी तो निरणी गवरल पूजती हां ओ बना इस विध पायो एसो श्याम,
सुहाग बनड़ी तो पूछ ओ बना लाड़ला हा ओ बना, किस विध पाई सुन्दर नार,
सुहाग निरणी तो निरणी थावर न्हाइयो, हां ए बनी इस विध पाई सुन्दर नार – सुहाग …
2सुहाग
चतर शाल बैठी बनड़ी पान चाब, करै रे दादाजी स्यू विनती दादाजी देश देता परदेश दिज्यो, म्हारी जोड़ी रो वर हेरज्यो दादाजी म्हें नहीं देख्या, म्हारी दादीजी नहीं देख्यां सहेल्या बताव वर न सावलो दूरा देशांरो चाल्यो राइवर, गिरदां स्यूं भरीयो, कुण बतावै वर न सांवलो हंस खेल ए दादोजी री प्यारी बनड़ी, हेर्यो छ फूल गुलाव रो (इसि तरह बाबा, पापा, काका, बिरा सभि नाम लेणा)
3सुहाग
बनी हीरे की अंगुठी रुमाल मांगे, बनी सोने की अंगुठी रुमाल मांगे । अपने दादाजी से रुपीया हजार मांगे, दादी रानी से अमर सुहाग मांगे । बनी हीरे की अंगुठी रुमाल मांगे । अपने बाबाजी से रुपीया हजार मांगे (इस तरह घर का नाम लेना)
***6 सुहाग
मैं एक छोटी सी, मै एक नन्ही सी बनी हूँ। तुम ही मेरे भरतार, बनाजी मेरी अरज सुनो । कुकु लाए है टिकी लाए है। बिंदीया है मेरा सुहाग ॥ बनाजी मेरी…… (इसी तरह गहनों का नाम लेना)
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