(तर्ज : बाईसा रो रूप)
आँख्या में काजल,माथे पे बिंदिया,झुमका झोला खावे सा गवरा बाई रो रूप देख के ईसर जी सरमावे सा
ईसर जी सरमावे सा ।
हिरणी सी चंचलता थारी, रेशम सा वळ ,खावे सा
गवरा बाई रो रूप देख के ईसर जी सरमावे सा
ईसर जी सरमावे सा
हो म्हारे गवरा बाई रो रूप सुहावणो सा (२)
हो म्हारे गवरा बाई रो नखरां घणो भावणो सा (२)
हो म्हारे गवरा बाई रो रूप सुहावणो सा (२)
रंग रंगीली चुनर थारी लहर लहर लहरावे सा
चुडलो बाजूबंद बोरलो, पायल शोर मचावे सा (२)
नेण नखत सु तीखा लागो कोयल जेड़ा बोलो सा
गवरा बाई रो रूप देख के ईसर जी सरमावे सा
ईसर जी सरमावे सा
हो म्हारा गवरा बाई लागे म्हणे ईसर जी सु प्यारा (२)
Anjubhajnsangeet
हो म्हारे जीव री जड़ी म्हारे कालजिये री कोर (२) नजरा लागे नहीं थारे थे म्हारी गणगौर हो थारे पगल्या रे पायलियो रा घुंघरू बाजना सा हो म्हारे हिवड़े रे मादलिये रा मोती सोवना रे हो म्हारे गवरा बाई रो रूप सुहावणो सा हो म्हारे गवरा बाई रो रूप..