Matbhedo Ki Tod Diware

मतभेदों की तोड़ दीवारें

आर्हत वाणी प्राण हमारा, हम इसका सम्मान करें। अपना जीवन बलिदान करें, सब मिल जुल नव्र अभियान करें।॥
-. महावीर तीर्थकर ही हम सबके भाग्य विधाता ‘है। महामंत्र नवकार हमारे जीवन का निर्माता है।
फिर क्यों दूरी रहे परस्पर युग हमको आह्वान करे ॥
2. जिन शाासन की प्रभावना में दूरी निश्चित बाधक है। बुद्धिवान के इस युग में मैत्री के स्वर ही साधक है।
मतभेदों की तोड़ दीवारें चरणों को गतिमान करें ॥
2. किसने कैसे व्यवहारों से आस्था को क्या रूप दिया।
महावीर के संदेशों को पहुंचाने क्या काम किया। युग देता है आज चुनौती फिर से नवनिर्माण करें ॥
3. महावीर के हम अनुयायी हम सबका स्वर एक हो। शतशाखी वटवृक्ष एक, शाखाएं भले अनेक हो। स्वर्णिम अवसर हमें पुकारे मंगलमय प्रस्थान करें ॥
(तर्ज : युगधारा में प्राणभरे)

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top