(तर्ज: जादुगर सैंया छोड़ मोरी बैंया )
टूटी फूटी नैया. तूं ही खेवैया.
हे प्रभु पार्श्वनाथ. अब भव पार करो ।
बचपन में प्रभु अद्भुत ज्ञानी जलते नाग निकारे,
महामंत्र नवकार सुनाकर उनको जग से उबारे,
हम पर भी दया कर नाथ, अब भव पार करो ।। १ ॥
पर उपकारी जग हितकारी, अश्वसेनजी के राज दुलारे, भक्तों के रखवारे, वामा माँ के प्यारे,
तेरे दर पे खड़े हैं अनाथ, अब भव पार करो ॥ २ ॥
सम्मेत शिखर पर ध्यान लगाकर, प्रभुजौ मोक्ष सिधारे, देवलोक में देवी देवता. जय-जय नाद उचारे,
ध्यावे “वीर मण्डल” दिन रात अब भव पार करो ॥ ३ ॥