यह सरस गीत संग्रह का एक भजन है — पारंपरिक भक्ति की धरोहर। A devotional song from the Saras Geet collection.
जय बोलो पार्श्व जिनेश्वर की
तर्ज (Tune): ओम् शांति जिनेश्वर
भजन के बोल / Lyrics
जय बोलो पार्श्व जिनेश्वर की।
जय ज्योतिर्मय जगदीश्वर की ।। ध्रुव ॥
प्रभु पार्श्व जाप से कष्ट कटे,
भव-भव का सब सन्ताप मिटे।
मंत्राक्षर संज्ञा प्रभुवर की ॥१ ॥
दुख नाग युगल का दूर किया,
नवकार मंत्र से बोध दिया।
बस फले कामना विषधर की ॥२ ॥
कमठासुर ने उपसर्ग दिया,
समता से उसके सहन किया।
बलिहारी समता सागर की ॥३ ॥
पतितों को तुमने तार दिया,
अधर्मों का भी उद्धार किया।
प्रभु प्यास हरो अब अन्तर की ॥४॥
प्रातः उठकर नित भजन करो,
आध्यात्मिक सच्ची विजय वरो।
मुनि कन्हैया’ करुणेश्वर की ॥५ ॥