ऊंचा-ऊंचा ओटा, गिरनार वाळा कोठा
ऊंचा-ऊंचा ओटा, गिरनार वाळा कोटा, राय दुलेचै सिंघ रो वैसणो जी।
सिंहासन बैठ्या माता मोरदि जी बोल्या, ज्यां कूख आदिनाथ जनमिया जी,
आदिनाच जनम्या भलो दिन पायो, रूड़ो दिन पायो, ज्यां स्वामी आद हिलाइया जी। घड़ी रे घड़ी में घड़ियावळ बाजै, पहर-पहर देवै आरतो जी।
ऊंचा-ऊंचा ओटा, गिरनार वाळा कोटा, राय दुलेचै सिंघ से बैसणो जी।
सिंहासन बैठ्या माता शिवादे जी बोल्या, ज्या कूख नेमीनाथ जनमिया जी।
नेमीनाथ जनम्या भलो दिन पायो, रूड़ो दिन पायो, ज्यां स्वामी राजुल तारिया जी।
ऊंचा-ऊंचा ओटा, गिरनार वाळा कोटा, राय दुलेचै सिंघ रो वैसणो जी।
सिंहासन बैठ्या माता वामादे जी बोल्या, ज्यां कूख पार्श्वनाथ जनमिया जी।
पार्श्वनाथ जनम्या भलो दिन पायो, रूड़ो दिन पायो, ज्यां स्वामी, नाग छुडाइया जी।
ऊंचा-ऊंचा ओटा, गिरनार वाळा कोटा, राय दुलेचै सिंघ रो वैसणो जी।
सिंहासन बैठ्या माता त्रिशलादे जी बोल्या, ज्यां कूख महावीर स्वामी जनमिया जी।
महावीर स्वामी जनम्या भलो दिन पायो, रूड़ो दिन पायो, ज्यां स्वामी तीरथ थपाईया जी।
ऊंचा-ऊंचा ओटा, गिरनार वाळा कोटा, राय दुलेचै सिंघ रो बैसणो जी।
सिंहासन बैठ्या माता नेमादेजी जी बोल्या, ज्यां कूख महाप्रज्ञ जनमिया जी।
महा जनम्या भलो दिन पायो, रूड़ो दिन पायो, ज्यां पूज्य पाट विपाइया जी।