Dwar Tere Darshan KO Aaye

तर्ज :- (बार बार तुझे क्या समझाये)

द्वार तेरे दर्शन को आये दिल में ले अरमान 
सद्बुद्धि दो, पार्श्वनाथ भगवान २
मतलब का संसार हार खाये यहाँ, 
छोड़ तेरा दरबार कहो जायें कहाँ
 एक नजर तो इधर निहारौ हम बालक अनजान ॥ १ ॥
पथरीले हैं टेढ़े मेढ़े रास्ते,
 निकल पड़े हैं हम मंजिल के वास्ते, 
सच्ची भक्ति हो मन में, तो क्या रोके तूफान ॥ २ ॥
पावों में तो पड़ी पाप जंजीर है,
 मन-मन्दिर में बसी तेरी तस्वीर है, 
“वीर मण्डल” को एक भरोसा, तेरा ही भगवान ॥ ३ ॥

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