म्हारी नैया खेवणहार तुलसी
लय : म्हारी नैय्या खेवणहार गुरुवर तुलसीगणी
म्हारी नैय्या खेवणहार गुरुवर तुलसीगणी,
म्हारा मोहन मुक्ताहार गुरुवर तुलसीगणी।
तुलसीगणी म्हारा हार हियारा,
तुलसीगणी म्हारा नयन सितारा,
च्यार तीरथ रा आधार गुरुवर तुलसीगणी ॥ स्थायी ॥
झुमरमलजी रा कुल उजियारा,
माँ वदना रा लाल दुलारा
सारै भूतल में गुलजार, गुरुवर तुलसीगणी ॥१ ॥
भैक्षवगण ने घणो दीपायो,
तेरापंथ ने खूब बढायो
याद आवैला उपकार, गुरुवर तुलसीगणी ॥२ ॥
मिसरी सरीखी तुलसी री वाणी,
शिवपुर री है, शुभ सहनाणी चमकै
सूरज सो दीदार, गुरुवर तुलसीगणी ॥३ ॥
कोड़ दीवाली राज करीज्यो
मुनि कन्हैया विजय वरीज्यो करो
कामना साकार, गुरुवर तुलसीगणी ॥४ ॥