(लय- होटों से छूलो तुम)
हनुमान भजन
धरती के कण कण में, हनुमान नज़र आए
हनुमान नजर आए, भगवान नजर आए
1. रावण ने हरी सीता, प्रभु वन वन भटके थे
लंका को जलाने में, हनुमान नज़र आए
२. जब शक्ति लगी लक्ष्मण, प्रभु सोच में बैठे थे
संजीवनी बूटी में, हनुमान नज़र आए
3. पाताल में अहिरावण, प्रभु को ले भागा था
बाली की सूरत में, हनुमान नज़र आए
4. लंका के जाने में, एक सागर था भारी पत्थर तैराने में, हनुमान नज़र आए हनुमान नजर आए ।
भगवान नजर आए ।।