Pitar Ji ,pitrani Ji Ke Geet

पित्तरजी

उत्तर दिखण स्यं जी ओ गाँधी को आयो, आय उतरियो हरिय बड़तड़ आओ गाँधी का जी ओ बैठ गाँधी का, तौले गाँधी को बेटो किस्तुरी।
काहे री डाँडी जी ओ काहे रो तोलो, तोल गाँधी को बेटो किस्तुरी ।
सोना री डाँडी जी ओ रूप रो तोलो, तोल गांधी को बेटो किस्तुरी ।
ए कुण जी मुलाव जी ओ ए कुण जी तुलाव, साचा पितर थांर सिग चढै।
दशरथ जी मुलावै जी ओ रामचन्द्र जी तुलावै, तोल गांधी को बेटो किस्तुरी सांचा पितर थार सिग चढ़े ।
छोटी सी तलाई जी ओ पाना फुलां छाई, आयो पितरां को लश्कर न्हावीयो न्हाया धोया देवता जी ओ पितर संतोष्या, ओज्यूं तलाई में पानी अंत घणो
छोटी सी बुगचड़ी जी ओ कपड़ा स्युं भरीयो
आयो पितरां रो लश्कर पेरग्यो
पेर्या देवी देवता जी ओ पितर संतोष्या
ओज्यु बुगची मं कपड़ा अंत घणा
छोटी जी डाबकड़ी जी ओ गहणा स्युं भरीयो
आयो पितरां रो लश्कर पेरग्यो
पेर्या देवी देवता जी ओ पितर संतोष्या, ओज्युं डिब्ब मं गहणा अंत घणा छोटी सी कड़ाई ज्याम लापसड़ी रन्धाई आयो पितरां रो लश्कर जिमग्यो
जिम्या देवी देवता जी वो पितर संतोप्या
ओज्यु कड़ाई में भोजन अंत घणो
छोटी सी बाटकड़ी ज्याम कुंकुं केशर घोल्या
आयो पितरां रो लश्कर चिरच गयो
चिरच्यां देवी देवता जी ओ पितर संतोप्याओज्यु बाटकड़ी म कुंकं अंत घणो ।
भुखा भुखा आज्यो जी ओ धाया धाया जाज्यो 
चवदश न थे आज्यो जी ओ अमावश न थे जाज्यो, 
थांरी सेवगा की बैल बधायज्यो ।
२.
पित्तरां थे म्हार आज्यो जी पित्तरा पावणा, पित्तरा भरन भादूङ र मास ओ रेशम रा रजा वारी ओ फला रा भारा , जोत सवाई जी नाड़ चानणा ।
पित्तरा, ऊंचातो घाल ओ पित्तरा बेसणा, पित्तरी लुललुल लागली पाय ओ रेशम रा रेझा
पित्तरां चावल रांधु ओ पित्तरां ऊजला, पित्तरा हरीया मूंगा री जी दाल ओ रेशम रा रेझा वारी ओ
पित्तरा पोली तो पोवु ओ पीतरां ललचली, पित्तरा तीवण तीस वत्तीस ओ रेशम रा रेझा
पित्तरां गीदी तो ढालुं ओ पित्तरां रेशमी, पित्तरां फूलड़ां तो जड्यो रे वाजोट ओ रेशम रा रेझा … ।
पित्तरां थाल परसो ‘ओ पित्तरां कुल बवां, फ्तिरां नेवर क झीणंकार ओ रेशम रा रेझा…
पित्तरां जिम्या तो जुठ्या जी पित्तरां रुच रया, पितरां इमृत चलु रे कराय ओ रेशम रा रेझा पित्तरां बेटा तो पोता थान धोकसी, पित्तरा बवां तो लाग लुल लूल पांव ओ रेशम रा रिझावारी ओ फुला रा भारा जोत सवाई जी नाड़ चानणो
***
३.
नानी सी आ नाडुली म पाणीड़ो बोलो म्हारे, पित्तरां रो नावण अन्त घणो जी म्हार देवता रो न्हावण अन्त घणो जी ।
हर न्हाया धोया पित्तर जब हुया रे खुशाला जब हुया रे सन्तोरव्या म्हारी नाडूली में ओजु पाणी अन्त घणो जी म्हारी राम तलाई म ओज्यू पाणी अन्त घणोजी ।
छोटी सी आ बाटकड़ी में केशर कुं कुं घोल्या म्हार चवां चन्दन घोल्या म्हार पित्तरा रो चरचण अन्त घणोजी म्हार देवता रो चरचण अन्त घणोजी हर चरच्या पुज्या पितर जब हूया रे सन्तोरव्या जव हूयारे खुशाला म्हारी बाटकडी मं चवा चन्दन अन्त घणो जीम्हारी बाटकड़ी म केशर कुं के अन्त घणो जी छोटो सो ओ बुगचा में कपडा घणेरा म्हार कड़ा कण्ठी बोला म्हार पित्तरां रो पेरण अन्त घणो जी म्हार देवता रो पेरण अन्त घणो जी हर पेर्या ओढ्या पित्तर जब ह्यारे खुशाला जद हृयारे सन्तोरव्या म्हारी डबुली मं कड़ा कण्ठी अन्त घणा जी, म्हार बुगचा मं कपड़ा बस्तर अन्त घणाजी हर छोटी सी आ चरुड़ी म चावला रांध्या म्हार लापसडी रंधायी म्हार पित्तरा रो भोजन अन्त घणो जी म्हार देवता रो भजन अन्त घणो जी हर जीम्या जुठ्या पित्तर जब ह्यारे सन्तोरव्या जब हृयारे खुशाला म्हारी चरुड़ी में ओजूं चावल अन्त घणा जी म्हारी राम रसोया म जीनवांरा भोजन अन्त घणा जी हर छोटी सी आ नगरी में साजन बोला सा महाजन बोला सा दादाजीरा बेटा पोता सुख बसो जी सा भुखा भुखा आज्यो थे धाया धाया जाज्यो ये बारी बाड़ी री बेल बधायज्यो जी ।
***पितरानीजी का गीत
कंठोड़ स्यू आया जी पितरानी प्यारा पावणा, 
कंठोड़ लिया रे मुकाम भलाई पधार्या जी पितरानी प्यारा पावणा
 स्वर्गापत स्यूं आयाजी पितरानी प्यारा पावणा, थांर घर लिया रे मुकाम 
चन्दन चौकी जी पितराणी जी थान बेसणा, दूध पखालुली पांव 
चावल राधुं जी पितराणी थान ऊजला; हरीया मूंगारी दाल 
घी बरतावू जी पितराणी थान टोकना, जालापुर री खांड़ फलका तो पोवू जी पितरानी थान ललचला, तीवण तीस बत्तीस 
केर करेला जी पितराणी थान स तलुं पापड़ तलुं रे पचास गीदी तो ढालुं जी पितरानी थान रेशमी फूलड़ां जड्यो रे बाजोट 
थाल परोस जी पितराणी थारी कुल बवां नेवरक झीण कार 
ओढपील रो बेस् जीमत नीरखूंजी पितराणी थारी आंगल्या बोलत सुगणी जीभ
जीम्या तो जुठ्या जी पितराणी प्यारा रुच रया, इमृत चलु कराय पोढण ठोड बताय । ऊंची तो मेड़ी जी पितराणी थान रावरी, दिवलो जगरे मगात
ओछा तो पाया जी पितराणी थान ढोलीयो डेर डावड़ री साड़ । 
बेटा तो पोता जी पितराणी थारा पोढ़सी थे थार स्वर्गापतन जाय होज्यो थान बैकुण्ठा रो बास । 
बन्श बधावो जी पितराणी थांर श्याम रो. बेटा-पोता रो, देवर जेठां रो, गोत कडुम्बरो ।

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