(तर्ज- लाडनूं रो हिरो)
सतिवर पधारे आई आज मंगल घड़िया. नूतन बहारे छाई कण कण में, हर्ष जन जनमें
आई आज मंगल घड़िया
① इन्तजार करते- 2 ये सुखद सुभग पल आए है
दर्शन पाकर आज आपके सबके मन हर्षाए है
छाई उमंगें आज हर मन में
२.शुभागमन यह मंगल उत्सव नई प्रेरणा लाया है, रजनी बीति सूर्य उदित हो नव प्रभात ले आया है
स्वागत के गीत आज, इक लय में
③ करने चार्तुमास पधारे अभिनव रौनक छाई है
महाश्रमण गुरुवर ने हम पर वत्सलता, बरसाई है झुक ,-२ कर करते वन्दन चरणन में है
④ चातुर्मास सफलतम होगा गुरुवर महर नजर भारी
नये -२ आयोजन आप कराये महके फुलवारी
छाया उल्लास आज कण-2 में