स्वागतम्
(लय – संयममय जीवन हो)
आज पधारे इस प्रांगण, समणी जी के गुण गाए!
स्वागत कर हर्षाएं ॥
* पर्युषण प्रवास मिला सिंगापुर भाग्य सराहे,
स्वागत कर हर्षाएं
निज पर शासन फिर अनुशासन कैसी सुन्दर भाषा
आज बदल कर रख दी इसने जीने की परिभाषा
अमृत रस बरसाने आये, इनको आज बधायें
* अणुव्रत प्रेक्षाध्यान साधना जीवन में अपनाए ।
पल-2 जागृत जीवन जीए तनिक नहीं अलसाये
श्रद्धा भक्ति और विनय से चरणों शीश झुकाये
हम सुधरेगे युग बदलेगा, इनकी अमृत वाणी
तीव्र तपोबल प्रबल मनोबल इनकी है सहनाणी
इनके आदर्शों पर चलकर, जीवन को चमकाये
भिक्षु तुलसी महाश्रमण गुरुवर की से शिष्याएं
दूर भगे जगसे अंधियारा देती ये शिक्षाएं
विमल रश्मियों को बिखरा कर ज्ञान की ज्योति जलाये